Hello Friends आज हम बात करेंगे की Deled Course 505 Assignment 1 Question 1 With Answer बारे मैं. Onlinestudent24 Website में आपका स्वागत है | Deled Course 504 Assignment का उत्तर वेबसाइट हिंदी पर पब्लिश हैं | आइये इस पोस्ट में Deled Course 505 Assignment 1 के पहला Question का उत्तर जानतें हैं |
Note :- ''इस लेख में Question का Answer हम अपने ज्ञान और सोंच के अधार पर दे रहे हैं | अगर आपको लगे की यह Answer सही नही हैं तो आप खुद सुधार या बदलाव कर सकतें हैं | इसे भी Assignment Copy में लिखने पर गलत नही होगा |''
505 Assignment 1 Question 1 With Answer
Q. 1) क्या प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन सीखना महत्वपूर्ण हैं ? अपने पक्ष में उचित उदाहरणों के सहायता से तर्क दीजिए |
Answer :- प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन सीखना महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि घर या घर से बाहर बच्चे प्रयावरण में ही पलते-पढतें हैं | हमे और हमारे बच्चे को पर्यावरण से गहरा संबंध होता हैं | बिना पर्यावरण के जीना मुस्किल हैं | इसी के अंतर्गत बच्चे सिखतें हैं , इस पर आश्रित हैं , इसमे योगदान करतें है तथा इसे प्रभावित करते हैं | जैसे की ये हमे प्रभावित करता हैं | ये
प्रभाव हमारे जन्म के साथ ही शुरू हो जाता हैं तथा पूरा जीवन चलता हैं | बच्चे का संसार अपने शरीर के प्रति जागरूकता से शुरू होकर धीरे – धीरे फैलता हैं |बड़े होते चक्रों की तरह जिसमे निकटस्थ वातावरण , परिवार एवं घर से पड़ोस , विद्यालय तथा उसके पर की दुनिया होती हैं |
अधिगम सबसे पहले तथा मुख्यत : घर तथा परिवार से शुरू होता हैं | जब बच्चा विद्यालय में प्रवेश ले लेता हैं अधिगम केवल विद्यालय में ही नही , घर तथा समुदाय में भी चलता रहता हैं |
बच्चे के आसपास का वातावरण एक संदर्भ हैं जिसके साथ बच्चा सबंध स्थापित करता हैं | इसमे भौतिक रचनाए तथा बाहरी स्थान नही होते बल्कि कहानियों , तयोहारो , गीतों तथा मेलो , परिवार एवं समुदाय के तयोहारो तथा अवसरों का सामाजिक एक सांस्कृतिक संसार भी होता हैं | निकटस्थ पर्यावरण के साथ अन्योन्य क्रिया के से सार्थक अधिगम होता हैं |
हर दिन बच्चा प्राकृतिक पर्यावरण का अनुभव करता हैं | जैसे की ऋतुये गर्मी , बरसात , सर्दी , आकाश , सूर्य और चाँद , जल के विभिन्न आयामों का , पौधों तथा जन्तुओ का यह बहुत निराशा की बात हैं की बच्चे समय सरणी , गृहकार्य तथा परिक्षये के व्यस्त नित्क्रम में फंसे है उनके पास ये सब छानबीन कर अनुभव करने का समय और स्थान उपलब्ध नही हैं |
खासकर छोटे बच्चे को अपने आसपास के संसार को देखने और समझने की सवाभाविक इच्छा होती हैं | यह बहुत आवश्यक है की उन्हें ऐसा पर्यावरण दिया जाए जो उनके अधिगम में सहायक हो और उन्हें सिखने के योग्य बनाए | राष्ट्रिय पाठ्यक्रम रुपरेखा 2005 (NCF 2005 ) ने इस लाजबाब अभिलक्षण एवं अवसर को स्वीकारा हैं |
इसीलिए प्रारंभिक वर्षो में अधिगम बच्चो की अभिरुचियों और प्राथमिकताओं के अनुसार होना चाहिए और बच्चो के अनुभव में संदर्भित होना चाहिए न की औपचारिक रूप से बनाया हुआ |
बच्चो को समर्थ बनाने वाला वातावरण वह होता है जो बच्चो को विभिन्न प्रकार के अनुभाओ की दिशा में प्रेरित कर सके , जो बच्चो को कुछ करने और खुलकर अपने आप को अभिव्यक्त करने की अवसर प्रदान करें | साथ ही वह सामाजिक संबंधो में रचा बसा हो | जिससे उन्हें स्नेह संरक्षण एवं विश्वास की अनुभूति हो |
Nios Deled की और जानकारी के लिए लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहे. उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आया होगा l अगर आपको ये पोस्ट अच्छा लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले धन्यवाद
Note :- ''इस लेख में Question का Answer हम अपने ज्ञान और सोंच के अधार पर दे रहे हैं | अगर आपको लगे की यह Answer सही नही हैं तो आप खुद सुधार या बदलाव कर सकतें हैं | इसे भी Assignment Copy में लिखने पर गलत नही होगा |''
505 Assignment 1 Question 1 With Answer
Q. 1) क्या प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन सीखना महत्वपूर्ण हैं ? अपने पक्ष में उचित उदाहरणों के सहायता से तर्क दीजिए |
Answer :- प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन सीखना महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि घर या घर से बाहर बच्चे प्रयावरण में ही पलते-पढतें हैं | हमे और हमारे बच्चे को पर्यावरण से गहरा संबंध होता हैं | बिना पर्यावरण के जीना मुस्किल हैं | इसी के अंतर्गत बच्चे सिखतें हैं , इस पर आश्रित हैं , इसमे योगदान करतें है तथा इसे प्रभावित करते हैं | जैसे की ये हमे प्रभावित करता हैं | ये
प्रभाव हमारे जन्म के साथ ही शुरू हो जाता हैं तथा पूरा जीवन चलता हैं | बच्चे का संसार अपने शरीर के प्रति जागरूकता से शुरू होकर धीरे – धीरे फैलता हैं |बड़े होते चक्रों की तरह जिसमे निकटस्थ वातावरण , परिवार एवं घर से पड़ोस , विद्यालय तथा उसके पर की दुनिया होती हैं |
अधिगम सबसे पहले तथा मुख्यत : घर तथा परिवार से शुरू होता हैं | जब बच्चा विद्यालय में प्रवेश ले लेता हैं अधिगम केवल विद्यालय में ही नही , घर तथा समुदाय में भी चलता रहता हैं |
बच्चे के आसपास का वातावरण एक संदर्भ हैं जिसके साथ बच्चा सबंध स्थापित करता हैं | इसमे भौतिक रचनाए तथा बाहरी स्थान नही होते बल्कि कहानियों , तयोहारो , गीतों तथा मेलो , परिवार एवं समुदाय के तयोहारो तथा अवसरों का सामाजिक एक सांस्कृतिक संसार भी होता हैं | निकटस्थ पर्यावरण के साथ अन्योन्य क्रिया के से सार्थक अधिगम होता हैं |
हर दिन बच्चा प्राकृतिक पर्यावरण का अनुभव करता हैं | जैसे की ऋतुये गर्मी , बरसात , सर्दी , आकाश , सूर्य और चाँद , जल के विभिन्न आयामों का , पौधों तथा जन्तुओ का यह बहुत निराशा की बात हैं की बच्चे समय सरणी , गृहकार्य तथा परिक्षये के व्यस्त नित्क्रम में फंसे है उनके पास ये सब छानबीन कर अनुभव करने का समय और स्थान उपलब्ध नही हैं |
खासकर छोटे बच्चे को अपने आसपास के संसार को देखने और समझने की सवाभाविक इच्छा होती हैं | यह बहुत आवश्यक है की उन्हें ऐसा पर्यावरण दिया जाए जो उनके अधिगम में सहायक हो और उन्हें सिखने के योग्य बनाए | राष्ट्रिय पाठ्यक्रम रुपरेखा 2005 (NCF 2005 ) ने इस लाजबाब अभिलक्षण एवं अवसर को स्वीकारा हैं |
इसीलिए प्रारंभिक वर्षो में अधिगम बच्चो की अभिरुचियों और प्राथमिकताओं के अनुसार होना चाहिए और बच्चो के अनुभव में संदर्भित होना चाहिए न की औपचारिक रूप से बनाया हुआ |
बच्चो को समर्थ बनाने वाला वातावरण वह होता है जो बच्चो को विभिन्न प्रकार के अनुभाओ की दिशा में प्रेरित कर सके , जो बच्चो को कुछ करने और खुलकर अपने आप को अभिव्यक्त करने की अवसर प्रदान करें | साथ ही वह सामाजिक संबंधो में रचा बसा हो | जिससे उन्हें स्नेह संरक्षण एवं विश्वास की अनुभूति हो |
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